Co-Cropping Scheme update 2023 : सरकार देगी 50% सब्सिडी, 1000 रुपये प्रति एकर पर, जानिए कैसे

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Co-Cropping Scheme update: कई राज्यों में शरदकालीन गन्ने की खेती चल रही है। फसल भी इन दिनों अच्छी होती है, इसलिए आप मूंग और मसूर की एक साथ बुवाई कर सकते हैं, जिसके लिए सरकार 50% अनुदान दे रही है।

Co-Cropping Scheme update 2023

मुंग और मसूर की खेती: देश के अधिकांश जगह में किसानों ने खरीफ की फसल के नुकसान की भरपाई के लिए शरदकालीन गन्ना लगाया है।

इन दिनों फसल में काफी बड़ोतरी देखा गया है। यदि किसान इस फसल से दुगुना उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं तो वे आलू, राजमा, चना, सरसों, सरसों सहित सब्जियों की फसलें भी उगा सकते हैं।

इसके लिए अलग से खाद या सिंचाई का प्रयोग नहीं होता, बल्कि गन्ने की खेती में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से काम किया जाता है।

इस बीच, बिहार राज्य सरकार गन्ने की खेती के साथ-साथ मसूर और गरम मूंग की बुवाई के लिए 50 प्रतिशत अनुदान भी प्रदान कर रही है। इस योजना का लभ उठाने के लिए आगे इस आर्टिकल को परे और जानिए पूरा तरीका 

गन्ने के साथ मूंग व मसूर की खेती

बिहार सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, राज्य में किसानों को शरद ऋतु के गन्ने की फसल के साथ ग्रीष्मकालीन मूंग और मसूर की फसल के लिए सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना के लिए आवेदन करने पर सरकार किसानों को गरम मूंग और मसूर के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान करेगी।

कोई भी किसान अधिकतम एक एकड़ भूमि पर इस दलहनी फसल की खेती के लिए उन्नत बीजों की खरीद पर अनुदान प्राप्त कर सकता है। सरकार ने अधिकतम 1000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी तय की है।

यहां आवेदन करें

शरदकालीन गन्ने की फसल के अलावा, जो किसान गर्म मूंग और मसूर के बीज बोना चाहते हैं, वे बिहार कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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अधिक जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी जिला कृषि विभाग कार्यालय में एग्रीकल्चर कोऑर्डिनेटर , एग्रीकल्चर अफसर एवं जिला कृषि पदाधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं. इच्छुक किसान कॉल सेंटर हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर कॉल कर संपर्क कर सकते हैं।

किसानों की आय को ज्यादा करने के लिए इंटरक्रॉप को बढ़ावा देना। गन्ने के अलावा दलहनी फसलें जैसे आलू, लहसुन, गेहूँ, गोभी, टमाटर, धनिया, मटर, राजमा भी बोई जा सकती है, लेकिन यह तभी संभव है जब गन्ने की खेती ट्रेंच प्रणाली में की जाये।

इस तरह की खेती से गन्ने के बीच में एक नाली बन जाती है, जहां बाद में सब्जी और दलहन की फसल बोई जा सकती है। इस तरह से खेती करने पर गन्ने की गुणवत्ता अच्छी होती है और उत्पादन 300 से 350 क्विंटल प्रति एकड़ दर्ज किया जाता है। 

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